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Sunday, 2 July 2023

Indian Comics Universe Fan Club Event - Comics Characters League

The much-anticipated Comics Characters League has been announced, set to bring together fans of Indian and foreign comics for an extraordinary showdown! In this unique contest, 8 passionate comic enthusiasts will carefully handpick 15 iconic characters, spanning heroes, side characters, and villains, to participate in intense one-on-one battles. The thrilling clashes will be decided by public voting, making it an event where fans' voices truly matter. 

 ICUFC द्वारा आयोजित Comics Characters League में अब हमारे पास 8 Teams तैयार हैं जिनका संचालन निम्नलिखित प्रतियोगी करेंगे।

टीम 1 - Prakash Sharma

टीम 2 - Manoj Kumar Garg

टीम 3 - Pritesh Chakraborty

टीम 4 - Saransh Rishi

टीम 5 - Sachin Kumar

टीम 6 - मोहन रैगर मौर्य

टीम 7 - प्रहलाद दुबे

टीम 8 - Rishabh Tiwari

प्रत्येक टीम में कौन कौन से कॉमिक्स कैरेक्टर्स हैं उसके लिए इस google sheet में देख सकते हैं। 

Info, stats, and table

आज से टीमों के बीच प्रतिस्पर्धा शुरू होती है। प्रतिस्पर्धा के लिए प्रतिदिन 2 teams आमने सामने होंगी। सभी प्रतियोगी उपरोक्त google sheet की 2nd sheet में अपनी dates नोट कर लें, उसके अनुसार ही प्रतिस्पर्धा होनी है।

प्रतिस्पर्धा के नियम

1) प्रतिदिन जिन दो प्रतियोगियों की team के बीच प्रतियोगिता होनी है वह अपनी टीम के किसी एक कैरेक्टर का नाम घोषित करेगा, जो उस दिन की प्रतियोगिता में उतरेगा। कौन सी टीम पहले नाम घोषित करेगी यह point table के रैंक के अनुसार होगा। यानी जिसकी रैंक ऊपर है निर्धारित करेगा की पहले वो नाम देना चाहता है या सामने वाली विपक्षी टीम को नाम देने को कहता है। 

2) ध्यान रहे एक कैरेक्टर एक ही बार वोटिंग में उतारा जा सकता है, इसलिए सोच समझ कर अपने कैरेक्टर का नाम दें। यदि आपको लगता है कि आपका कैरेक्टर जीत सकता है तो उसे उतारें अगर आपको लगता है सामने वाले के कैरेक्टर के जीतने के चांस ज्यादा हैं तो अपना कमज़ोर कैरेक्टर उतार कर अपने स्ट्रॉन्ग कैरेक्टर को बाद के लिए बचा सकते हैं। 

3) नाम देने का समय रात 9 बजे तक है यदि तब तक टीम लीडर नाम देने में असमर्थ रहा तो आयोजकों द्वारा उनकी टीम से कोई भी एक नाम घोषित कर दिया जायेगा। 

4) रात 10 बजे उन 2 घोषित नामों के बीच वोटिंग के लिए एक poll का निर्माण आयोजकों द्वारा किया जायेगा। वोटिंग चलने तक टीम लीडर चाहे तो अपने करैक्टर को जिताने के लिए ग्रुप में अपने करैक्टर के बारे में पोस्ट कर ग्रुप मेंबर्स और अपने मित्रों से उसे वोट देने की अपील कर सकता है।

5) वोटिंग की अवधि अगली रात 12 बजे तक होगी। वोटिंग का समय समाप्त होनें पर आयोजकों द्वारा एक स्क्रीनशॉट लेकर उसी poll के comment box में पोस्ट किया जायेगा। उसके बाद कोई वोट मान्य नहीं होगा। उसी स्क्रीन शॉट के आधार पर रिजल्ट घोषित होगा।

6) वोटिंग के विजेता टीम को 2 प्वाइंट मिलेंगे और उसका वोटिंग परसेंटेज का रिकॉर्ड रखा जायेगा। Point Table के लिए उपरोक्त Google Sheet की 3rd शीट देख सकते हैं। वोटिंग टाई होने पर दोनों टीमों को 1-1 प्वाइंट मिलेंगे। 

7) इसी प्रकार सभी टीमें आपस में प्रतिस्पर्धा करेंगी। और राउंड 1 समाप्त होने पर top 4 टीम अगले राउंड के लिए क्वालीफाई करेंगी। 

8 ) - टीम लीडर्स ने जो अपनी टीम के लिए कैरेक्टर्स चुने हैं, वो चाहें तो उन्हें बदल भी सकते हैं, परंतु बदला वही कैरेक्टर जायेगा जिसकी वोटिंग न हुई हो। बदलने के लिए पहले राउंड में कोई 2 कैरेक्टर, दूसरे राउंड में 2 कैरेक्टर और फाइनल राउंड में 1 कैरेक्टर बदला जा सकता है। कैरेक्टर बदलने के लिए आयोजकों को इसकी सूचना देनी होगी, और बदलने के नियम वही रहेंगे यानी मेन कैरेक्टर के बदले मेन, साइड के बदले साइड और विलन के बदले विलन, RC के बदले RC और other के बदले other। 

9) टीम लीडर्स चाहें तो पहला राउंड खत्म होने के बाद eliminate (बाहर) हो चुकी टीम के कैरेक्टर भी ले सकते हैं लेकिन उसके लिए टीम रैंकिंग को प्रायोरिटी मानी जायेगी। इसी तरह दूसरे राउंड के बाद फाइनल में भी 2 एलिमिनेट हुए टीम के कैरेक्टर्स में से बदला जा सकता है।

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Monday, 22 January 2018

Balbinder Singh's Experience (FMC) - Silver Medalist, Indian Comics Fandom Awards 2017

इंडियन कॉमिक्स फैंडम अवार्ड्स 2017 की फैन वर्क श्रेणी में रजत स्थान फैन मेड कॉमिक्स को मिला। फैन मेड कॉमिक्स के संचालक एवम कलाकार श्री बलबिन्दर सिंह ने अपना कॉमिक प्रेम और सफर हमसे साझा किया। FMC टीम के सभी सदस्यों को जीत की बधाई और उनके जज़्बे को सलाम!
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बलबिन्दर सिंह

अपने कॉमिक्स जगत के सफ़र के बारे में बताऊँ तो ऐसा लगता है एक जमाना बीत गया है। 1994 के आसपास पापा एक कॉमिक लाये थे - "नागराज और बुगाकु" जिसके रंग बिरंगे चित्रों ने मुझे मोहित किया। इसके अलावा मेरे दो बड़े भाई भी कॉमिक के बहुत शौक़ीन थे और उनके पास एक काफी बड़ा कलेक्शन था। हम खेल भी कॉमिक संबंधी ही खेलते थे जहाँ वे दुकानदार बनते थे और हम ग्राहक जो उनसे कॉमिक खरीदने आते थे। फिर देखते ही देखते जमाना बीतता गया और कॉमिक का प्रचलन बंद हो गया। यह सन् 2002 की बात रही होगी जहाँ मैंने बस अड्डे से 2 कॉमिक खरीदी- "शक्ति ख़त्म" और "जम्बू और भूकंप"। (नाम पक्का याद नहीं)...सन् 2009 में जब इंटरनेट से परिचय हुआ तो भी मैं नेट में राज कॉमिक्स के बारे में बहुत सर्च करता रहता था खासकर इमेजज डाउनलोड करता था। जिसे अपने वालपपेर पर सेट कर लेता था। सन् 2012 में मैंने एक ब्लॉग से कोड नेम कॉमेट कॉमिक्स डाउनलोड की और इस तरह पायरेसी से ही सही पर मेरी कॉमिक जगत में पुनः वापसी हुई। मैंने बहुत सी कॉमिक डाउनलोड की और अपना एक ब्लॉग बना लिया। सच कहूँ यह भी मेरा कॉमिक के प्रति जुनून ही था पर शायद मेरा तरीका गलत था। फिर मैंने खुद ब खुद फोटो शॉप सीखा और फिर मैंने एक फ़ेसबुक ग्रुप में डोगा और ध्रुव पेज को एडिट कर ध्रुव को शक्तिमान बनाया और सेर सवा सेर नाम से इसे अपलोड कर दिया। रात को मैंने अपलोड किया था और सुबह मेरे उठने से पूर्व 120 के करीब लाइक थे।

मैंने मन बना लिया कि इस कॉमिक को जरूर बनाऊंगा। Youtube ट्यूटोरियल देख देख मैंने फोटोशॉप सीखा और जुलाई 2016 में अपनी प्रथम फैन मेड कॉमिक सेर सवा सेर रिलीज़ की। तब से अब तक फोटोशॉप कॉमिक में बहुत सुधार आया है। इसके अलावा मैंने काफी हद तक कलरिंग भी सीखी है। हाई स्कूल में जो आर्ट छोड़ चुका था और पुनः अभ्यास शुरू कर दिया है। जल्द ही मैं अपने पात्र लांच करने वाला हूँ जो इस प्रकार है -#भरत जो  समय को नियंत्रित कर सकता है। #अलग जो एक हाइब्रिड पशु मानव है। #रफ़्तार_सिंह जो एक शापित पर अमर हीरो है।
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Wednesday, 27 September 2017

Fan Rohit K. Pandey


Rohit Kumar Pandey
"It was the last week of June, 1996; My father got posting in Balrampur (UP) at the post of a Hindi Lecturer in PG college. I was going with him along with my mother and brother(who is 3 years younger than me). We were at the platform of Ara railway station (Bihar), my eyes caught the cover of a book at the book stall. It was a comics of Nagraj and I fell in love with him the very first time; it was like a love at first sight. I started whispering to my brother to ask mummy to buy this comics. He requested her and we finally got our first comics. He told me that he would like to see it first and I gave that to him (the 4 YO kid) :) and I knew that he would complete it in couple of minutes :p Then I started to read and it was like to enter in a new world of fantasy and charisma. Later on I still read such kind of books and I admit the fact that there is a big role of them in the creation of my core human values. These books always teach good to a child and in last truth always wins. In Fact I did not like when Nagraj was beaten by goons in any comics. Doga, Kobi-Bhedia and Tiranga were my favorite, however I like every superhero. I also read Tulsi comics, Diamond comics, DC and Marvel apart of my all time favorite Raj comics. Bankelal was also my favorite, however my brother likes Parmanu.
Thanks a lot for reading this post. I am glad to get company of you people who are sharing the same interest in comics as me! :) "

Sunday, 17 September 2017

कॉमिक्स यादें (श्री रवि यादव) #mycomicsstory


बात शायद 1994 की है, एक बच्चा स्कूल जाता और रास्ते में पड़ने वाली बुक शॉप पर टकटकी लगाकार एक धागे पर टंगी कॉमिक्स को देखता . कॉमिक्स के कवर पर पीली-नीली पोशाक पहने एक लड़का रेल के इंजन से बंधा हुआ था और उसके पास में एक रोबोट की शक्ल वाला व्यक्ति खड़ा था. पता नहीं उस तस्वीर में क्या जादू था कि उस बच्चे का यह नियम बन गया की रोज स्कूल जाते समय उस कॉमिक्स को टकटकी लगाकर ललचाई नजरो से देखना. बच्चा तब तक भोकाल और नागराज की कई कॉमिक्स पढ़ चुका था या यूँ कहिए उनके चित्रों का आनंद ले चुका था पर जब से उसने इस कॉमिक्स को देखा तो बाकी सब कुछ भूलकर उसने इसे पाने की ठानी. कॉमिक्स उसे अपनी बड़ी दीदी और भैया से मिलती थी और वे भोकाल की कॉमिक्स पढ़ना ज्यादा पसंद करते थे. दोनों से बड़े प्यार से गुजारिश की पर उन दोनों के मना करने पर बच्चे का दिल बहुत दुखी हुआ. अगले कई दिनों तक यही क्रम चला पर बच्चे के छोटे हाथों से अब भी वह कॉमिक्स बहुत दूर थी.
बच्चे ने एक तरकीब निकाली उस कॉमिक्स को और पास से देखने के लिए वह अब पचास पैसे की टाफी लेता और उस कॉमिक्स को निहारता. एक दिन दुकानदार अंकल ने पूछा बेटा तुम रोज इन रंग बिरंगे चित्रों वाली किताबों को देखते हो इनमे से तुम्हे क्या चाहिए? अंकल इन रंग बिरंगे चित्रों वाली किताब को कॉमिक्स कहते हैं बच्चे ने बड़ी मासूमियत से जबाव दिया .दुकानदार अंकल ने हंसकर पूछा और तुम्हे इनमे से कोनसी चाहिए? .बच्चे ने धडकते दिल से ऊँगली से इशारा किया वो. दूकानदार अंकल ने वो कॉमिक्स धागे पर से उतारकर उस बच्चे के हाथों मे थमा दी बस फिर क्या था मानो बच्चे को सारा जहाँ मिल गया. बार-बार कॉमिक्स उलट-पुलट कर देखते उस बच्चे को दुकानदार अंकल ने कहा कि बेटा तुम्हारे भैया भी मुझसे कॉमिक्स ले जाते हैं और उन्होंने कॉमिक्स एक रुपया किराये पर देने की बात कही पर बच्चे ने कॉमिक्स वापस अंकल को दी और कहा की अंकल जी आप किसी को ये देना मत मैं जल्दी ही इसे खरीद लूँगा. घर में बार-बार जिद करने पर भी जब 15 रूपये जमा नहीं हुए तो बच्चे का मन बहुत उदास हो गया बरहाल एक रूपये में वो कॉमिक्स किराये पर ली गई, स्कूल बैग में रखकर जब आधी छुटटी में उसे आधा –अधुरा पढ़ा तो नीली-पीली ड्रेस वाला वो हीरो जिसका की नाम सुपर कमांडो ध्रुव था बच्चे के दिल और दिमाग पर छा गया ये जूनून से उस बच्चे का पहला परिचय था.घर आकर जब बच्चे ने कॉमिक्स को पूरा पढ़ा तो बच्चे के दिल ने कहा कहा कि जब पुरे 15 रूपये हो जाएंगे तो सबसे पहले ये कॉमिक्स ही लूँगा अगले कुछ दिनों तक बच्चा “रोबो मैग्नाटो! मुझे अपनी शक्ति दो” चिल्लाता घूमा (हालाँकि कॉमिक्स में ये डाइलाग कही पर भी नहीं था)....

बच्चे का ये जूनून रंग लाया 19 साल बाद जब RC के नागराज जन्मोत्सव कार्यक्रम में स्टेज पर एंकर श्री क्षितिज शर्मा ने SCD से रिलेटेड क्विज कांटेस्ट मे प्रश्न पूछे तो बच्चे (जो की अब 29 साल का हो चुका था ) ने कुछ प्रश्नों के उत्तर पूरा प्रश्न सुने बिना ही दे दिए. मंच के ठीक सामने विरजमान भारतीय कॉमिक्स जगत के सभी महानुभावो और सभी कॉमिक्स प्रेमियों ने तालियों की करतल ध्वनि की लेकिन बच्चे को शायद ध्रुव की बाइक की तरह एक स्पेशल आवाज़ की गूंज का वर्षो से इंतज़ार था वो थी ..”क्या बात है” 
आवाज को सुनकर बच्चे को लगा की आज फिर उसके हाथ में उस नीली-पीली ड्रेस वाले, उसके अपने सपनो के हीरो की कॉमिक है जिसे वो पहली बार छू रहा है .ये आवाज थी उस शख्सियत की जिसने ध्रुव को रचा है “श्री अनुपम सिन्हा जी”.

वो बच्चा (यानी की मैं) आज 31 साल का हो गया है और उसके पास ये कॉमिक्स जिसका की नाम “चुम्बा का चक्रव्यूह” है ,समेत ध्रुव की सभी कॉमिक्स और 2000 से भी अधिक कॉमिक्स हैं....SCD के जूनून की इन्तहा ये है की इसके बिना जीवन अधुरा लगता है ........................
बचपन में जो SCD पढ़ने का मजा आया था वो आज भी बरकार है.. आज भी मैं नए सेट की हर RC फैन की तरह प्रतीक्षा करता हूँ.....

आप सबकी तरह ही एक जुनूनी कॉमिक्स प्रेमी,
रवि यादव (myr)

Wednesday, 23 August 2017

Fan Comics


नमस्ते! पिछले कुछ वर्षों में लेखकों और कलाकारों के कुछ समूह मिलकर फैन कॉमिक्स और अपने रचे किरदारों पर कॉमिक्स बना रहे हैं। यूएफसी (Ultimate Fans of Comics-UFC), एफएमसी (FAN MADE COMICS-Junoon Never Die), कॉमिक्स ऑर पेशन (Comics Our Passion【COP】), ICUFC comics आदि पर युवा मित्र निरंतर किसी ना किसी आईडिया, आर्ट पर बात कर रहे होते हैं। व्हाट्सप्प पर जाने कितने आईडिया पर ब्रैनस्टोर्मिंग चलती रहती है। यहाँ दो श्रेणियों की कॉमिक हैं एक एडिटेड कॉमिक्स जिनमे पूर्व प्रकाशित पैनल और आर्टवर्क को कहानी के अनुसार एडिट किया गया है, दूसरी में नए कलाकारों, लेखकों द्वारा बनाई गयी कॉमिक्स।
कई बार आपके नोटिफिकेशन में इन ग्रुप्स पर हुई पोस्ट वाली अपडेट दिखती होगी, उसे नज़रअंदाज़ करने की आदत ना डालें। आप सभी से निवेदन है कि कभी-कभार इन ग्रुप्स, कलाकारों की वाल चेक करें और इनके काम, कॉमिक्स को पढ़कर, डाउनलोड कर अपनी राय व प्रोत्साहन देते रहें। #fancomics #fanwork #indie #fmc #ufc #icufc #cop

Tuesday, 28 July 2015

Interview - Dr. Alucard (Illuminati Comics & Comics Khazana Magazine)

वैसे तो मैंने इनसे पॉडकास्ट का वायदा किया था पर हर बार कुछ ना कुछ गड़बड़ होने के कारण एक लेख के रूप में डॉ. Alucard एडिटर, illuminati कॉमिक्स, desi-american.com  (छद्म नाम) का साक्षात्कार पोस्ट कर रहा हूँ। इसके अलावा देसी अमेरिकन डॉट कॉम एवम कॉमिक्स खज़ाना पत्रिका के ज़रिये ये अपनी टीम के साथ हमारा मनोरंजन करते आये है। - मोहित शर्मा (ज़हन) #mohit_trendster


*) - पहचान के लिए ऐसे छद्म नामो के इस्तेमाल की क्या वजहें है?

सबसे पहले तो धन्यवाद मोहित मुझे आपके पॉडकास्ट पर invite करने के लिए . जी हाँ DR. ALUCARD मेरा alias है . ऐसा करना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि मेरा भी परिवार है , मैं एक कॉमिक्स फैन के रूप में सबको एंटरटेन करना चाहता हूँ but not at cost of my own problems/life. असल में सबसे बड़ी दिक्कत रही है कॉपीराइट की . इस प्रोजेक्ट को करते वक़्त कुछ सवाल बार-बार सामने आये - कहीं ये काम गलत तो नही होगा ? पात्रों के कॉपीराइट का हनन ? कानूनी-गैर-कानूनी इत्यादि। लेकिन ये सब सवाल कॉमिक्स को बचाने और उस की लोकप्रियता बढ़ाने का है। यही जुनून है जिसने हमें कई बातें सिखाई। मैं सभी पब्लिशर और रचनाकारों से कहना चाहूँगा की हम सभी आप से बेहद प्रेम करते हैं और आपके शुक्रगुज़ार हैं की आपके अथक परिश्रम के कारण हमारा बचपन इतना सुंदर और यादगार बना। हमारा ध्येय किसी भी प्रकार से कॉपीराइट का हनन करना या पब्लिशर को नुकसान पहुँचाना नहीं है। ना ही हम किसी प्रकार से भारतीय हीरोज़ को पश्चिमी  हीरोज़ से कमतर आंकने की कोशिश कर रहें हैं। हम सिर्फ भारत में कॉमिक्स के प्रति पाठकों की रूचि बढ़ाना चाहते हैं । अगर किसी भी पब्लिशर और रचियता को इससे समस्या हो तो हमें ईमेल करें ताकि हम मिल कर इस का समाधान कर सकें। एक और महत्वपूर्ण बात - हमने इस कॉमिक श्रृंखला की सिर्फ डिजिटल कॉपी ही बनायीं है और इसे पाठकों को बिना किसी मूल्य के बाँट रहे हैं।  जब मैंने ये प्रोजेकट शुरू किया तब मैंने बहुत लोगों से हेल्प मांगी लेकिन सिर्फ कुछ चुनिन्दा लोगों ने ही मदद की. ऐसा इसलिए क्योंकि सबको डर था की क्या ये कॉपीराइट नियम का उलंघन होगा ? हाँ कुछ हद तक उनका डर सही भी है . लेकिन मैं सभी पाठकों को कहना चाहता हूँ की ये सिर्फ फैन-आर्ट है. हम इसे non-commercial, non-monetary, non-profit रूप में बना रहे हैं और हमारा इसका कोई hardcopy बनाने का कोई विचार नहीं है . हम fans से इसके के लिए कोई पैसा नहीं ले रहे हैं . अब आप ही बताये कॉपीराइट उल्लंघन क्या है ? क्या सुपर हीरोज़ के drawing बनाना, उन पर कलर करना , उनके images को फेसबुक पर लगाना ये अलग है ? नहीं यह भी उल्लंघन है . मेरे पहले फ्रैंक knot, नवनीत जी , इंदरजीत भानुजी etc भी यह कर चुके है . हमारा उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन है और कुछ नहीं . असल में राज कॉमिक्स, डायमंड कॉमिक्स, DC, मार्वल बहुत बड़ी कंपनियां है और मुझे नहीं लगता के उन्हें इस प्रकार के फैन-आर्ट से कोई समस्या होगी. उनके लिए तो फिलहाल पायरेसी बहुत बड़ी प्रॉब्लम है . वैसे भी इस प्रकार कर फैन-आर्ट शायद नए readers को जोड़ने में मदद करे ! मैं नहीं कहता की इन कम्पनीज को मेरे फ्री की पब्लिसिटी की ज़रुरत है . नहीं , बिलकुल नहीं . यह तो सूरज को दीपक दिखाने जैसा होगा . यह कॉपीराइट और इस प्रकार के सवाल भी कहीं ना कही fans के दिमाग की ही उपज है . मुझे पूरी उम्मीद है की कॉमिक्स कंपनी इसे फैन-आर्ट के रूप में ही लेगी और इसका कोई issue नहीं बनाएगी . और अगर फिर भी उन्हें कोई भी समस्या हो तो तो वे हमे ईमेल कर सकते है और हम तुरंत अपना प्रकाशन रोक देंगे. मेरे ख्याल से fans को इस बात को यहीं भूल जाना चाहिए और अपना वक़्त इस बेकार के डिस्कशन के बजाये इस कॉमिक्स का मज़ा लेने में लगाना चाहिए .  

*) क्या आप पहले भी किसी ऑनलाइन कम्युनिटी से जुड़े थे यदि हाँ तो कौन कौन सी? 

मैं शायद ओरिजिनल इन्टरनेट कॉमिक्स फैन में से एक हूँ . मैं ब्लोग्स , ऑरकुट के विभिन्न फोरम , rcj , देसी-अमेरिकन और हर साईट से जुड़ा हूँ . इन शोर्ट अगर नेट पर कॉमिक्स है तो मैं वहां पर जुड़ा हुआ पाउँगा

*) - इस कॉमिक्स को बनाने का आईडिया कैसे आया व इस कहानी में क्या ख़ास बातें मिलेंगी पाठकों को?

एक कॉमिक्स फैन के लिये यह एक सपना पूरा होने की स्थिति होती है जब उनके सब मनपसंद हीरोज़ चाहे  अलग-अलग पब्लिकेशन या भाषा के एक साथ काम करें या एक-दूसरे से टकराये। मुझे उम्मीद है की आपको मेरा ये प्रयास अच्छा लगा होगा। मैं इस प्रोजेक्ट पर कई सालों से काम कर रहा हूँ। इतना समय इसलिए लगा क्योंकि ये काम अकेले इंसान के बूते के बाहर की बात है। साथ ही साथ मैं नहीं चाहता था की जल्द बाज़ी में आपको दोयम दर्ज़े की चीज़ पेश करूँ। इसमें विभिन्न स्तरों पर काफ़ी मित्रों ने सहायता की। मैं उन सभी का शुक्रगुज़ार हूँ। उनके बिना ये संभव नही था. ख़ास बात ये है की STORY IS FOR THE FANS, BY THE FANS. इसमें ओल्ड स्कूल स्टाइल की 90 के दशक के तरह की कहानी देखेंगे जहाँ हर कॉमिक्स की अपनी एक अलग स्टोरी है लेकिन ये सब स्टोरी एक मुख्य  उद्देश्य / कहानी की तरफ बढती है . शायद इसी कारणवश ये सिंपल है काम्प्लेक्स नहीं. इसका RC के सर्वनायक के साथ कोई भी तुलना बेमानी है .

*) - अपनी टीम के बारे में कुछ बतायें?
वैसे तो हम 4-5 लोग है . मेरे अलावा हमारे ग्राफ़िक कंसलटेंट है skhan भाई . और राइटर है stories के लेकिन अभी तक उनके alias रेडी नहीं है तो मैं आपको बता नही सकता लेकिन कॉमिक्स के साथ ही आप वो नाम ज़रूर देख पाएंगे

*) - कॉमिक आईडिया से लेकर आर्टवर्क एडिटिंग की प्रक्रिया से हमे अवगत करवायें।
फोटोशॉप सीखना , एक अच्छी कथा श्रृंखला लिखने की कोशिश करना , पूरी तैयारी करना इत्यादि बहुत मुश्किल रहा। ये कहना गलत होगा की सब कुछ मैंने अकेले किया है। सबसे अजीब बात ये रही की अंत में मैं photoshop सीखने में नाकाम रहा और फिर हमने आर्टवर्क MSPAINT और EXCEL की मदद से किया . आर्टवर्क के लिए raw images हमने स्कैन नहीं की है. यह सब हमने इन्टरनेट से ही लिया है . हमने पहले मुख्य स्टोरी पर काम किया, फिर हर कॉमिक्स की स्टोरी पर, फिर उनके स्क्रिप्ट्स और संवादों पर. अंत में हम पेज-by-पेज आर्टवर्क करते हैं


*) - प्रस्तुत कॉमिक और आगे की सीरीज के टीज़र्स के बारे में। 
अर्थ 24- पॉइंट जीरो . ये हमारी पहली कॉमिक्स है. पूरी कहानी की सूत्रधार . यहाँ हम देख रहे है फ़ोबोस और मोबोस (कोबी-भेड़िया वाले) के बीच लड़ाई को जो २४वे आयाम की पृथ्वी पर ज़लज़ला ला देगी . इस आयाम की खासियत ये है के हर आयाम की विशेषता और हीरोज़ इसमें है . इसमें कुछ चीज़े वो ही हो सकती है जो पाठकों को पता है लेकिन कुछ ट्विस्ट भी नए होंगे . जैसे पाठकों को ध्रुव ले पिता के बारे में पता है लेकिन यहाँ एक नया ट्विस्ट है, वैसे ही नागराज की कुछ शक्तियां है तो कुछ नहीं . सीरीज की सभी कॉमिक्स की प्लानिंग अभी नहीं हुई है लेकिन अभी २ कॉमिक्स कम्पलीट है और 5 की स्क्रिप्ट पर काम चल रहा है .

*) - आजकल के माहौल में अपने काम को कहाँ आंकते है ?
well ये तो अपने मुँह मिया मिठू वाली बात हुई. हमारा सही आंकलन तो आप और बाकि फैन ही कर सकते है . हमने हमारा काम प्रोफेशनल स्तर पर करने की कोशिश ज़रूर की है और ज़रूर दूसरे जितने भी फैन कॉमिक्स आये है उनसे आपको ये बेहतर और लयबद्ध लगेगा लेकिन हम अपनी तुलना RC या किसी कंपनी से नहीं करते. हम फैन है और उसी पहचान से खुश है

*) - देसी अमेरिकन वेबसाइट का विचार कब आया, इसके क्या उद्देश्य है और कैसा रिस्पांस मिल रहा है?
असल में साईट का विचार मेरा नहीं है . ये हमारे मित्र MR.NIK की है जिससे हम मिले और फिर इसी से जुड़ गए. यहाँ सबसे अच्छी बात ये है की इस साईट के कंटेंट ज़िन्दगी के हर पहलु से जुड़े है और यहाँ पर सबके लिए कुछ ना कुछ है . साईट का रेस्पोंसे अच्छा है .. हर रोज़ नए मेम्बर बन रहे है . मेरी सबसे येही रिक्वेस्ट है की आप साईट पर फ्री रजिस्ट्रेशन करे और लॉग इन कर कमेंट्स करे ताकि हम आपके विचार जान सके .nik के अनुसार इस साईट का मुख्य उद्देश था लोगों को जोड़े रखना. सभी जानते है की ऑरकुट की फोरम व्यवस्था अच्छी थी और अब उसके बंद होने के बाद सब फेसबुक से जुड़े हैं . लेकिन फेसबुक में पुरानी पोस्ट्स पढना मुश्किल होता है और कोई गारंटी नहीं के फेसबुक ये कब तक शुरू रखेगा. इसलिए यह साईट बने गयी जो हमेशा के लिए परमानेंट जगह हो दोस्तों के मिलने के लिए. तभी रजिस्ट्रेशन पर इतना जोर दिया जा रहा है . और यहाँ का रजिस्ट्रेशन कुछ दूसरी साईट के समान कठिन नहीं है . यह बिलकुल आसान है .

*) - पसंदीदा लेखको, कलाकारों के बारे में बतायें। 
मेरे ख्याल से अनुपम जी , मनु जी , स्कॉट snyder , बॉब kane, stan ली और प्राण सर ... 

*) - समकालीन कॉमिक्स पब्लिकेशन्स के काम से क्या आप संतुष्ट है? भारतीय कॉमिक्स से जुड़े अपने कुछ अनुभव, सुझाव आदि बताएं। 
मैं भारतीय इंग्लिश कॉमिक्स से बहुत संतुष्ट हूँ जैसे की होली काऊ, लेवल १० , याली ड्रीम , स्पीच बबल etc . इनका आर्टवर्क और पेपर क्वालिटी इस प्रकार होती है की उनकी ज्यादा कीमत भी भारी नहीं लगती. हालाँकि मेरा मानना है की वो कीमत थोड़ी कम कर सकते है . जहाँ तक हिंदी की बात है फेनिल जी से बहुत उम्मीद है और RC व डायमंड के अलावा कोई इंडस्ट्री के लीडर नहीं है. डायमंड की कॉमिक्स – चाचा चौधरी से ही मैं इस कॉमिक्स की दुनिया में आया.. फिर नागराज और ध्रुव का ऐसा साथ मिला के छुटा ही नहीं . एक मजेदार वाकया है , मै 4 साल का था और फैमिली के साथ ट्रेन में जा रहा था. घरवालों ने स्टेशन से चाचा चौधरी की कॉमिक्स ले कर दी लेकिन मुझे तब तक पढना नहीं आता था . मैं बार-बार बड़े भाई से पढने के लिए ज़िद कर रहा था . तभी एक अंकल जो सामने की सीट पर थे, मुझसे बोले “ इतने बड़े हो और पढना नहीं आता ?” शायद वो ही बात मेरे बाल सुलभ मन को लग गयी और मैंने खुद पढना शुरू किया.. और फिर पढने की ऐसी लत लगी की आज तक नहीं छुटी . मैं सिर्फ राज कॉमिक्स से अनुरोध करना चाहूँगा – गलतियाँ नहीं निकल रहा हूँ क्योंकि मैं अपने आप को उस लायक नही मानता – अनुरोध ये है की आप सेट निश्चित समय में निकले, और ज्यादा नहीं तो परमाणु, डोगा और भोकाल इन हीरोज़ पर भी ध्यान दे . आर्टवर्क आपका बहुत अच्छा हो गया है अब. साथ ही साथ पुरे देश में कैश-ओन-डेलिवरी शुरू करे और छोटे शहरों में जहाँ आपकी कॉमिक्स नहीं मिलती वहां कुछ प्रबंध करे . हो सके तो टायर-२ शहरों में भी कभी छोटे मोटे बुक फेर करे या वहां के उद्योग मेलों में भाग ले

*) - अब कॉमिक्स कल्चर किस तरह पहले से अलग है ? इन बदलावों को आप कैसे देखते है ?
कॉमिक्स कल्चर पहले से अच्छा हुआ है लेकिन डर भी लगता है की कहीं हमारी जनरेशन आखरी ना  हो कॉमिक्स फैन की !! यह हमारी ज़िम्मेदारी है की हम अगली पीढ़ी को कॉमिक्स से introduce करवाए . इन्टरनेट और ऑरकुट का बहुत बड़ा योगदान रहा है कॉमिक्स को DARK ages से बाहर लाने का . उम्मीद करता हूँ ये कारवां ऐसे ही बढ़ता जायेगा . अंत में, मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ की जूनून को ज़िन्दा रखें, आने वाली पीढियों में कॉमिक्स कल्चर को बढ़ावा दें और BUY COMICS & SAVE COMICS INDUSTRY !
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Update 

हमारी कॉमिक्स - " अर्थ 24 - पॉइंट जीरो " काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिली और आप सबके ईमेल भी प्राप्त हुए । सबसे अच्छी बात की हमारी कॉमिक्स को 250 से ज़्यादा डाउनलोड मिले है । प्रशंसा सभी को अच्छी लगती है लेकिन हमने कोशिश की है की आप की आलोचनाओं से भी सीखे । इन सभी बातों को ध्यान रख कर पिछली कॉमिक्स के सवालों का जवाब देने के लिए 
Illuminati Comics और desi-american.com पेश करते हैं " ग्राउंड जीरो - राइज ऑफ़ दी सरपेंट " जो ना सिर्फ कहानी को आगे बढ़ाएगी बल्कि सवालों का जवाब भी देगी । जी पाठकों की शिकायत थी की पहली कॉमिक्स बहुत छोटी थी उनके लिए भी खुशख़बरी है की ये अपने-आप में पूर्ण कॉमिक्स होगी जिसमें 40 पेज होंगे । महासंग्राम का पहला पड़ाव आरम्भ होगा 6 अप्रैल से" - Dr. Alucard (Illuminati Comics)

Thursday, 5 September 2013

Die-hard Comic Fan's Rating Scale....


*Posted on different Indian Comics Communities, Groups & Pages.

Note: Bas ek observation hai hum comic fans ki...iska kuch nakaratmak nishkarsh na nikalen. Aur haan, mai Negatives (abhi padhi nahi) ya Aghori ki baat nahi kar raha aese bhaaghirathi efforts hamesha mere liye 8/10 ki rating se upar hi rehte hai. 

Ek baat note ki hai comic fans mey ki jo aap log kisi Movie, Book, TV series etc ko apne review mey rate karte ho aur jo aap log comics ko rate karte ho unme antar dikhta hai. Comics ki rating mey adhiktar fans lenient ho jaate hai jiska matlab achchhi khabar yeh hai ki hum sab die hard comic fans hai :) aur buri yeh ki comics k maamle mey ordinary critic. 

Matlab agar multimedia waala comparison na kare to ek Movie/TV Series/Book dekhkar aapko jo santushti mili aur lagbhag us hi level ki santushti aapko ek comic padh kar mili to (ya jo bhi aapke dimaag mey rating scale tay ho uske hisaab se dono cheez almost barabari par hon)....phir udahran k liye us movie ko to aap rate karoge 3/5 (60%) jabki usi hisaab ki comic ko rate kar doge 4/5 (80%)....4.5/5 (90%)...aur kuch log to 5/5. Haan, kuch fans k diye reviews mey ye rating difference bahut kum ya na ke barabar dikhta hai par aam taur par aesa observe kiya maine....

Ek advice aur...koi bhi effort na to 0/5 hota hai na hi 5/5.

 Ek baat aur...Happy Teachers Day! :P

- Mohit Trendster