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Sunday, 12 May 2024

क्लासिक नागराज

Sharvil Singh - "वैसे तो क्लासिक नागराज का ज्यादातर अब मजाक ही उड़ाया जाता है पर मुझे आज भी वो कहानियां बेहतरीन लगती हैं। बत्तीस पेज में जो मनोरंजन होता था आज कचरा पेटी, शुद्धिकरण सागा जैसी महामारियों में मिलना मुश्किल है। 

उन कहानियों में कुछ अलग ही बात थी। अन इंटेंशनल ह्यूमर भी एकदम बेहतरीन लगता है। 

Bakora का जादू क्या कमाल की कॉमिक्स थी।

अजगर का तूफान, मिस्टर 420, बौना शैतान इन कहानियों का टच अलग होता था। आपकी क्या राय है?"

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इस पोस्ट पर संदीप जुयाल ने जवाब दिया - "मुझे भी शुरुआती नागराज, ध्रुव की कॉमिक्स बेहतरीन लगी थी हालांकि मैंने बचपन मे इनकी शुरुआती कॉमिक नही पढ़ी थी 2012 में जब मैने इनकी शुरुआती कॉमिक्स पढ़नी शुरू की तो वाकई में उनसे प्यार हो गया नागराज का जो आतंकवाद को मिटाने का सफर था बेहतरीन था वह इसलिए क्यों कि नए नए विलेन आते थे नया एडवेंचर होता था कहानियो में आर्ट भी बेमिसाल था तो नए वाले नागराज से मुझे पुराने वाला ज्यादा बढ़िया लगा हालांकि नए वाले नागराज की भी कई कॉमिक्स बढ़िया है लेकिन पुराने वाले नागराज के विलेन कुछ अलग ही थे एक रोमांचक सफर होता था नए दोस्त मिलते थे और खूबसूरत लडकियो ने भी नागराज के इस सफर में खूब साथ दिया था।

आजकल के बच्चो को शायद इतना सिंपल आर्ट और कहानी पसंद न आए लेकिन मुझे काफी पसंद है।"

Sunday, 1 September 2019

देवेन पाण्डेय का प्रशंसक से लेखक बनने का सफर #ICUFC


"यह समूह कॉमिक्स से सम्बंधित है,किन्तु मैं यहां अपने द्वितीय उपन्यास से सम्बंधित पोस्ट कर रहा हूँ।
क्यो? क्योकि इस उपन्यास की नींव इसी ग्रुप में पड़ी थी, अब नए सदस्य जुड़ गए है जिन्हें शायद याद नही किन्तु पुराने सदस्यों को अब भी वह समय याद है जब यह ग्रुप विभिन्न पोस्ट और टिप्पणियों से आबाद रहा करता था।
उस समय क्रिएटिविटी अपने चरम पर होती थी। हर सदस्य अपने आप मे कोई न कोई अनूठी बात लिये होता था। अनेक प्रतियोगिताएं होती थी, अनेक फैन्स अपने चित्र, फैन फ़िक्शन इत्यादि यहां शेयर किया करते थे।
काफी पुराने पाठक इस समूह के जरिये दोबारा कॉमिक्स से जुड़े (जिनमे मैं भी शामिल हूँ।) यहां आकर पता चला यह समूह प्रतिभाशाली सदस्यों से भरा हुआ है। यहां से अनेक सदस्य फैन होने से लेकर क्रिएटिव जगत में अपनी अलग पहचान बनाने तक का सफर पूर्ण कर चुके है।  लगभग 6-7 वर्ष पहले जब यह समूह विभिन्न प्रकार की हलचलों से आबाद रहता था उसी समय बाली के कथानक ने जन्म लिया था। अन्य मित्रों को देखकर मुझे भी कुछ लिखने बनाने का मन होने लगा, मैंने भी एजेंट नाइन सीरीज की 3 कॉमिक्स स्वयं बनाई, कथा,चित्र,रंग सभी खुद किये। धुरंधर पाण्डेय नामक चरित्र भी बनाया। वह समय ही अलग स्तर का जोशीला वातावरण लिये हुए था, मुझे याद है #कॉमिक्स-ट्रेंड-फिर-बढ़ाये का अभियान जो हमने आरम्भ किया था😋। उसी समय कुछ बहुमुखी प्रतिभाओं के धनी मित्रों के साथ एक अलग और ओरिजनल फैन फ़िक्शन बनाने की बात चली, जिसमे हम सभी अपने अपने हुनर या कलाकारी को सबके सामने ला सके ।

यश ठाकुर, मोहित शर्मा, नालिनाक्ष ईशु, आशीष खरे,सुरेश जी,अजय थापा, हरेंद्र सैनी जैसे अनेक मित्रों के साथ बाली नामक चरित्र बनता बिगड़ता रहा☺️ यहां तक कि एक सम्पूर्ण 30 पृष्ठों की कॉमिक्स तक बन चुकी थी।
किन्तु होनी को कुछ और ही मंजूर था, विभिन्न कारणों एवं धीरे धीरे दुनियादारी की व्यस्तताओं के चलते सब अलग होने लगे और फैन फ़िक्शन का सपना सपना ही रह गया। समय ने सबका जोश ठंडा कर दिया, वो बचपना अब समझदारी की परतों तले कही छिप सा गया, जीवन की आपाधापी में प्राथमिकताएं बदलती चली गई। नतीजतन बाली अनेक बार बनते बनते बन्द हो गया। इसी समूह से और अपने फैन फ़िक्शन और लेखन से अनेक लोगो से पहचान हुई जिनमे से कुछ स्थापित लेखक और प्रकाशक तक हैं और मेरा पहला उपन्यास 'इश्क बकलोल'प्रकाशित हुआ, जो मेरी पहली ऑफिशयल साकार रचना थी। इश्क बकलोल को उम्मीद से अधिक पसन्द किया गया और पाठकों एवं समीक्षकों का खूब प्यार मिला। अब यहां आकर फिर से हिम्मत जुटने लगी, बाली जेहन में उछल कूद करने लगा और फिर मैंने प्रकाशक को कॉन्सेप्ट बताया, वे फौरन राजी हो गए और मैंने इस बार बिना किसी अन्य टीम के बाली पर कार्य आरम्भ कर दिया, मुश्किलें फिर आई (जिनके बारे में विस्तार से लेखकीय में लिखा है।) किंतु इस बार पक्का निर्णय कर चुका था। और अंततः बाली 420 पृष्ठों के रूप में सजीव हो चुका था। पौराणिक चरित्रों, कथाओं एवं किवदंतियों पर आधारित यह पात्र अब प्रकाशित हो चुका था। हालांकि मैं डर रहा था कि न जाने पाठक क्या प्रतिक्रिया देंगे, सुपरहिरोइक पात्र और कहानियां विदेश में जितनी प्रचलित है, अपने भारतीय परिवेश में वे उतनी सहज नही हैं। किन्तु इसके पश्चात भी पाठकों की अभूतपूर्व प्रतिक्रिया मिली और मेरा उपन्यास प्री ऑर्डर में ही अस्सी प्रतिशत तक समाप्त हो गया। अमेजॉन पर आउट ऑफ स्टॉक होकर पुनः स्टॉक अपडेट किया गया। दूसरी रिलीज के महीने भर के भीतर दूसरी बार रीप्रिंट करवाया गया।

जिन्होंने पढ़ी उनकी प्रतिक्रिया भी शानदार रही और उन्हें यह कथानक बेहद पसंद आया। और इन सबमे इस समूह का भी बड़ा योगदान है। इस समूह एवं उसके सदस्यों ने सदैव से यहां अनेक सृजनशील एवं प्रतिभाशाली सदस्यों का उत्साहवर्धन किया है। तो बाली की उत्स्फूर्त सफलता के लिए एवं प्रतिसाद के लिये मैं इस समूह के प्रत्येक सदस्य का हृदय से आभारी हूँ। और हां कह सकते है, बाली उपन्यास मेरे कॉमिक्स प्रेम और इस समूह को ट्रिब्यूट है ।😋 (मैं यहां कोई खरीदी बिक्री एक लिंक नही दे रहा हूँ, क्योकि मेरा वह उद्देश्य था ही नही।)"

Wednesday, 27 September 2017

Fan Rohit K. Pandey


Rohit Kumar Pandey
"It was the last week of June, 1996; My father got posting in Balrampur (UP) at the post of a Hindi Lecturer in PG college. I was going with him along with my mother and brother(who is 3 years younger than me). We were at the platform of Ara railway station (Bihar), my eyes caught the cover of a book at the book stall. It was a comics of Nagraj and I fell in love with him the very first time; it was like a love at first sight. I started whispering to my brother to ask mummy to buy this comics. He requested her and we finally got our first comics. He told me that he would like to see it first and I gave that to him (the 4 YO kid) :) and I knew that he would complete it in couple of minutes :p Then I started to read and it was like to enter in a new world of fantasy and charisma. Later on I still read such kind of books and I admit the fact that there is a big role of them in the creation of my core human values. These books always teach good to a child and in last truth always wins. In Fact I did not like when Nagraj was beaten by goons in any comics. Doga, Kobi-Bhedia and Tiranga were my favorite, however I like every superhero. I also read Tulsi comics, Diamond comics, DC and Marvel apart of my all time favorite Raj comics. Bankelal was also my favorite, however my brother likes Parmanu.
Thanks a lot for reading this post. I am glad to get company of you people who are sharing the same interest in comics as me! :) "

Saturday, 23 September 2017

Comic Memories (Ashu Khairwal‎)

‎Ashu Khairwal‎
#MY_COMICS_STORY
यह बात शुरू होती है जब आज की तरह जब आज की तरह दुनिया की रफतार तेज नहीं हुआ करती थी.90 का दशक रहा होगा जब मैने कोमिक पढ़ना शुरू ही किया था. वो भी मेरे पिताजी की वजह से जब वो चन्दामामा और इन्द्रजाल की कोमिक लाया करते थे. इन्द्रजाल तो आज भी उनकी पसंदीदा कोमिक है . मैने भी कोमिक इन्द्रजाल के पात्र फैंटम से पढ़ना शुरू किया था. तब मेरी कोमिक पढ़ने की शुरूआत हो चुकी थी. फिर कोमिक की दुकान से किराये पर कोमिक लाने की शुरूअात हो चुकी थी.1 रूपये में पूरे 1 दिन के लिये कोमिक लाना शुरू किया जो की दादी से मिल जाया करते थे. लेकिन कोमिक किराये पर लाना आसां नहीं हुआ करता था. क्यूंकी माँ ने कोमिक देख लिया तो बहुत डांट पड़ती थी.ईसलिये कोमिक को कमीज के अंदर छुपा कर लाना पढता था. सुपर कमांडो ध्रुव बचपन से मेरा पसंदीदा रहा है. उसकी सादगी और कभी ना हार मानने वाला ज़ज्बा मुझे बेहद पसंद है. गर्मियो की छूट्टीयो में मैं हर रोज 1 कोमिक पढा करता था. ज़िसमे मेरी पसंदीदा थी प्रतिशोध की ज्वाला, ड्रेकुला दिल्ली में , मुझे मौत चाहिये, चाचा चौधरी और उड़ने वाली कार और नागराज. वो एक सुनहरा दौर था. लेकिन धीरे धीरे वक्त अपनी रफतार पकड़ता गया और 2000 सन तक कोमिक काफी पीछे छूट गयी. फिर फेसबुक पे अपने जैसे कोमिक प्रेमियो से मुलाकात हूयी और उनसे दोस्ती होती चली गयी. और कोमिक पढ़ने और उन्हे संग्रह करने का चस्का फिर से लग गया. अब जैसे जैसे समय आगे बढ़ता जा रहा है वैसे वैसे ये शौक भी गेहरा होता जा रहा है. और कोमिक संग्रह में भी व्रद्धी हो रही है . मेरी छोटी सी मित्र मंडली में काफी दोस्त है !! धन्यवाद मित्रों !!

Sunday, 17 September 2017

कॉमिक्स यादें (श्री रवि यादव) #mycomicsstory


बात शायद 1994 की है, एक बच्चा स्कूल जाता और रास्ते में पड़ने वाली बुक शॉप पर टकटकी लगाकार एक धागे पर टंगी कॉमिक्स को देखता . कॉमिक्स के कवर पर पीली-नीली पोशाक पहने एक लड़का रेल के इंजन से बंधा हुआ था और उसके पास में एक रोबोट की शक्ल वाला व्यक्ति खड़ा था. पता नहीं उस तस्वीर में क्या जादू था कि उस बच्चे का यह नियम बन गया की रोज स्कूल जाते समय उस कॉमिक्स को टकटकी लगाकर ललचाई नजरो से देखना. बच्चा तब तक भोकाल और नागराज की कई कॉमिक्स पढ़ चुका था या यूँ कहिए उनके चित्रों का आनंद ले चुका था पर जब से उसने इस कॉमिक्स को देखा तो बाकी सब कुछ भूलकर उसने इसे पाने की ठानी. कॉमिक्स उसे अपनी बड़ी दीदी और भैया से मिलती थी और वे भोकाल की कॉमिक्स पढ़ना ज्यादा पसंद करते थे. दोनों से बड़े प्यार से गुजारिश की पर उन दोनों के मना करने पर बच्चे का दिल बहुत दुखी हुआ. अगले कई दिनों तक यही क्रम चला पर बच्चे के छोटे हाथों से अब भी वह कॉमिक्स बहुत दूर थी.
बच्चे ने एक तरकीब निकाली उस कॉमिक्स को और पास से देखने के लिए वह अब पचास पैसे की टाफी लेता और उस कॉमिक्स को निहारता. एक दिन दुकानदार अंकल ने पूछा बेटा तुम रोज इन रंग बिरंगे चित्रों वाली किताबों को देखते हो इनमे से तुम्हे क्या चाहिए? अंकल इन रंग बिरंगे चित्रों वाली किताब को कॉमिक्स कहते हैं बच्चे ने बड़ी मासूमियत से जबाव दिया .दुकानदार अंकल ने हंसकर पूछा और तुम्हे इनमे से कोनसी चाहिए? .बच्चे ने धडकते दिल से ऊँगली से इशारा किया वो. दूकानदार अंकल ने वो कॉमिक्स धागे पर से उतारकर उस बच्चे के हाथों मे थमा दी बस फिर क्या था मानो बच्चे को सारा जहाँ मिल गया. बार-बार कॉमिक्स उलट-पुलट कर देखते उस बच्चे को दुकानदार अंकल ने कहा कि बेटा तुम्हारे भैया भी मुझसे कॉमिक्स ले जाते हैं और उन्होंने कॉमिक्स एक रुपया किराये पर देने की बात कही पर बच्चे ने कॉमिक्स वापस अंकल को दी और कहा की अंकल जी आप किसी को ये देना मत मैं जल्दी ही इसे खरीद लूँगा. घर में बार-बार जिद करने पर भी जब 15 रूपये जमा नहीं हुए तो बच्चे का मन बहुत उदास हो गया बरहाल एक रूपये में वो कॉमिक्स किराये पर ली गई, स्कूल बैग में रखकर जब आधी छुटटी में उसे आधा –अधुरा पढ़ा तो नीली-पीली ड्रेस वाला वो हीरो जिसका की नाम सुपर कमांडो ध्रुव था बच्चे के दिल और दिमाग पर छा गया ये जूनून से उस बच्चे का पहला परिचय था.घर आकर जब बच्चे ने कॉमिक्स को पूरा पढ़ा तो बच्चे के दिल ने कहा कहा कि जब पुरे 15 रूपये हो जाएंगे तो सबसे पहले ये कॉमिक्स ही लूँगा अगले कुछ दिनों तक बच्चा “रोबो मैग्नाटो! मुझे अपनी शक्ति दो” चिल्लाता घूमा (हालाँकि कॉमिक्स में ये डाइलाग कही पर भी नहीं था)....

बच्चे का ये जूनून रंग लाया 19 साल बाद जब RC के नागराज जन्मोत्सव कार्यक्रम में स्टेज पर एंकर श्री क्षितिज शर्मा ने SCD से रिलेटेड क्विज कांटेस्ट मे प्रश्न पूछे तो बच्चे (जो की अब 29 साल का हो चुका था ) ने कुछ प्रश्नों के उत्तर पूरा प्रश्न सुने बिना ही दे दिए. मंच के ठीक सामने विरजमान भारतीय कॉमिक्स जगत के सभी महानुभावो और सभी कॉमिक्स प्रेमियों ने तालियों की करतल ध्वनि की लेकिन बच्चे को शायद ध्रुव की बाइक की तरह एक स्पेशल आवाज़ की गूंज का वर्षो से इंतज़ार था वो थी ..”क्या बात है” 
आवाज को सुनकर बच्चे को लगा की आज फिर उसके हाथ में उस नीली-पीली ड्रेस वाले, उसके अपने सपनो के हीरो की कॉमिक है जिसे वो पहली बार छू रहा है .ये आवाज थी उस शख्सियत की जिसने ध्रुव को रचा है “श्री अनुपम सिन्हा जी”.

वो बच्चा (यानी की मैं) आज 31 साल का हो गया है और उसके पास ये कॉमिक्स जिसका की नाम “चुम्बा का चक्रव्यूह” है ,समेत ध्रुव की सभी कॉमिक्स और 2000 से भी अधिक कॉमिक्स हैं....SCD के जूनून की इन्तहा ये है की इसके बिना जीवन अधुरा लगता है ........................
बचपन में जो SCD पढ़ने का मजा आया था वो आज भी बरकार है.. आज भी मैं नए सेट की हर RC फैन की तरह प्रतीक्षा करता हूँ.....

आप सबकी तरह ही एक जुनूनी कॉमिक्स प्रेमी,
रवि यादव (myr)

Sunday, 7 February 2016

RIP Padma Shri Artist Sudhir Tailang (1960-2016)



Sudhir Tailang ji, born in Bikaner (Rajasthan). He came out with his first artwork in 1970. Sudhir ji started his career with the Illustrated Weekly of India in Mumbai, in 1982. A year later, he joined the NBT Media (in New Delhi). He had worked with all major English newspapers including the Hindustan Times, the Times of India and the Indian Express. His last assignment was with the Asian Age.

Sunday, 30 November 2014

कॉमिक्स से जुड़े 2 मज़ेदार किस्से - मोहित शर्मा (ट्रेंडस्टर) Podcast



कॉमिक्स से जुड़े 2 मज़ेदार किस्से - मोहित शर्मा (ट्रेंडस्टर) Podcast




Yahan Agra, Lucknow mey hue 2 vaakye baant raha hun aap sabke saath. Aasha hai aap sabko ye podcast pasand aayegi.

- Mohit Trendster