Tuesday, 1 February 2022

Review: Incognito (Swyambhu Comics)

 

Reviewer - Shahnawaz Khan

मैं कॉमिक रिव्यु नही लिखता हूं। लेकिन इस कॉमिक को पढ़ने के बाद मैं खुद को रोक नही पाया। इतने सालों में किसी कॉमिक से इतनी ज़बरदस्त स्टोरी और ट्रीटमेंट मिली है। आर्टवर्क में थोड़ा पीछे रह गई वरना हर मामले में ये एक मास्टरपीस होती। 40 पेजेज में भर भर के स्टोरी डाली गई है जिससे पेजेज की कमी महसूस नही होती। स्टैंड अलोन इशू है और क्या गज़ब की कहानी है। ऐसा करैक्टर न कभी देखा है ना ही सुना है। सच कह तो ऐसा करैक्टर बनाना अपने आप मे ही एक खोज है। हर कॉमिक लवर के लिए मस्ट रीड है। बस शिकायत है तो आर्टवर्क की जो मैं होप करता हूँ आने वाले टाइम में सही हो जाएगी

My rating 8/10

Sirf artwork aur coloring se maat kha gai warna ye ek 10 out of 10 cheez hai

Sunday, 9 January 2022

कारवाँ - प्रतिशोध (याली ड्रीम क्रिएशंस) समीक्षा - संदीप जुयाल

 काफी समय बाद याली ड्रीम्स के कारवाँ सीरीज की लास्ट कॉमिक कारवाँ प्रतिशोध आई जिसका मुझे बेसब्री से इंतजार था लेकिन इतने इंतजार के बाद भी जो मजा आना चाहिए था कहानी में वो नही आया मेरे ख्याल से सीरीज का आखिरी पार्ट होने के नाते इसकी कहानी और भी बढ़िया होनी चाहिए थी लेकिन अफसोस कि बात है कि जितना सोचा था उससे कम ही निकली कहानी के मामले में यह कॉमिक

कवर - अगर कवर की बात की जाए तो कवर बहुत ही आकर्षक बन पड़ा है  जिसमे कहानी के मेन किरदारों को जगह दी गयी है और अपना भैरोसिंह भी काफी खूंखार अंदाज में दिखाई दे रहा है मतलब फुल मेहनत की गई है कवर में जिसमे की  पूरी तरह से कामयाब रही है याली ड्रीम्स

कहानी - इस बार याली ने कहानी को तीन भागों में बांटा हुआ है जिसमे पहला भाग है "भोर" दूसरा भाग है "सांझ" तीसरा और अंतिम भाग है "रात"

बात अगर कहानी की करूँ तो इसकी शुरुआत होती है कारवाँ(1st) के अंत से जहाँ आसिफ, दुर्गा, भैरोसिंह और जय मिलकर रानी भैरवी और उसकी पूरी नौटंकी मंडली का खात्मा कर देती है कारवाँ प्रतिशोध की  कहानी यही से आगे बढ़ती है-

कहानी मेरी नजर में सिर्फ इतनी ही है कि मधुराक्षी अब अपनी माँ भैरवी को जीवित करना चाहती है और भैरवी कैसे जीवित होगी उसका हल भी मधुराक्षी  सोच लेती है और पड़ जाती है दुर्गा और आसिफ के पीछे अपना प्रतिशोध लेने के लिए  लेकिन वह दुर्गा और आसिफ के पीछे क्यों पड़ती है और माँ भैरवी को जीवित करने के लिए उसके पास क्या हल होता है बस इसी बात को जानने के लिए आपको यह कॉमिक पढ़नी होगी। 

कहानी में भैरोसिंह अपने पूरे दबंग अंदाज में  दिखाई देता है दुबारा उसे देखकर आपको जरूर मजा आएगा

आर्टवर्क - आर्टवर्क की बात की जाए तो तीन अध्याय है और तीनों में आर्टवर्क अलग अलग है जो कि कॉमिक पढ़ने के मजे को बेकार कर देता है हालांकि आर्टवर्क अपने अपने स्तर पर अच्छा है लेकिन एक ही आर्टिस्ट से सारा काम करवाया होता तो हम पाठकों को और भी ज्यादा मजा आता। 

अब पहले अध्याय में आसिफ काफी बड़ा दिखाई देता है और आखिरी अध्याय में आसिफ बच्चा दिखाई देता है साथ ही कुछ पेज जहां बहुत ही निम्न स्तर के बने है वही कुछ पेज बहुत ही शानदार बने है खासकर मधुराक्षी के बोल्ड सीन्स और लड़ाई के सीन्स 

अंत मे पूरी कॉमिक की बात की जाए तो मुझे यह कहानी एवरेज लगी अभी तक कारवाँ और कारवाँ- खूनी जंग दोनों बढ़िया थी कहानी के मामलों में करवा प्रतिशोध से उम्मीदे और भी  ज्यादा थी करीब 4,5 साल का इंतजार भी रहा इसका लेकिन इसकी कहानी मेरी उम्मीदों पर खरी नही उतरी लेकिन आर्टवर्क काफी अच्छा रहा है इसका पहली दो कॉमिक से तो यह अच्छी बात है।

याली से सिर्फ इतना ही कहना चाहूंगा कि कहानी को ज्यादा बड़ा न किया जाए साथ ही एक सीरीज को बीच मे इतने लंबे समय के लिए न छोड़ा जाए और अंतिम बात  एक सीरीज पर सिर्फ एक ही आर्टिस्ट से काम करवाया जाए  अलग आर्टिस्ट अलग आर्टवर्क कॉमिक के पूरे मजे को खराब कर देती है।

दोस्तो आप भी कमेंट में  बताईए आपको यह कॉमिक और पूरी सीरीज कैसी लगी

रेटिंग

कहानी- 5/10, आर्टवर्क- 7/10, पूरी कारवाँ सीरीज-  7/10

Sunday, 6 June 2021

Tushar Trivedi's Ideas

 आज अहमदाबाद के तुषार त्रिवेदी साहब का जन्मदिन है। एक दौर था जब इनकी और रुड़की निवासी मयंक शर्मा की परिकल्पनाओं पर कई कॉमिक्स (Raj Comics) प्रकाशित हुई। इतनी कि कहा जा सकता है कि विवेक मोहन जी को अंग्रेजी फ्रेज़ "run for his money" प्रतिस्पर्धा मिली। 

अच्छा लगा कि उस समय जो रचनाकार, कलाकार हमें डेमीगॉड सरीखे लगते थे उनमें अपने जैसे नाम आने लगे। तुषार भाई के स्टोरी प्लॉट्स पर शानदार कॉमिक्स बनती रहीं फिर राज कॉमिक्स थोड़ी डाउन हुई और तुषार भाई भी अपने कारोबार में व्यस्त हो गए। मुझे पूरा यकीन है कि अब भी उनके पास कई बेहतरीन आईडिया होंगे जो कभी आगे कॉमिक्स प्रेमियों को पढ़ने को मिलेंगे। जन्मदिन मुबारक, तुषार भाई!

#ज़हन

Friday, 18 December 2020

नीरद जी का अनुभव

 

"एक स्थानीय कार्टूनिस्ट हैं। कार्टूनिंग में खूब जोर है उनका...मोटा हाथ, पतला पैर.. जो मन में आया, बना दिया! कार्टून में कोई रोक-टोक तो है नहीं!

एक बार एक संस्था ने उन्हें एक पुस्तक के आवरण के चित्रांकन का काम दिया। पुस्तक का नाम था 'बाल एवं मातृत्व स्वास्थ्य'.

फिर क्या था, बना दिया उन्होंने! चित्र में मां अपने नवजात बच्चे को गोद में ली हुई थी। सब ठीक था। कोई दिक्कत नहीं...

मगर चित्र से विषय ही बदल गया। बच्चे के पोलियो स्वास्थ्य का विषय बन गया!

दरअसल उन्होंने बच्चे का पैर बहुत पतला कर दिया था!🤣

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संजीदा विषयों के लिए रियलिस्टिक चित्रांकन ही प्रभावी होता है।"